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Monday, February 15, 2010



































































अटारी
पर मोर
कहते हैं कि घटा और मोर का काफी गहरा संबंध है।घटा देखते ही मोर के मन में उल्लास की लहरें दौड़्ने लगती हैं। शरद की एक संध्या को आसमान में बादला क्या दिखे, मोर अटारी पर आ पहुंचा।तस्वीरों में उसकी भाव-भंगिमाएं क्या बताती हैं, आप भी देखें और कुछ सोचें.











Thursday, February 4, 2010

साहित्य और मीडिया :संकट






























साहित्य और मीडिया: संबंधों का संकट
19वें अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले के अवसर पर राष्ट्रीय प्रकाशक संघ दिल्ली ने साहित्यकारों, मीडियाकर्मियों, प्रकाशकों और पाठकों के साथ एक संगोष्ठी का आयोजन किय.संगोष्ठी
का विषय था --साहित्य और मीडिया: संबंधों का संकट। अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।इस संगोष्ठी में यह बात उभरकर आई की आज साहित्य और मीडिया दोनों समाज से कट गए हैं।इसका मूल कारण दोनों माया युग में माया के फिराक में पड़कर समाज से दूर होते जा रहे हैं।जबकि साहित्य और मीडिया दोनों का काम समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, हो रहे शोषण,शासक वर्ग की ज्यादितियों खिलाफ अपने-अपने माध्यमों से उनका चित्रण करना था और आइना दिखाना था लेकिन ये माध्यम् आज खुद दागदार हो गए हैं।लिहाजा हमें ही अपने गिरेबान में झांकना होगा और समाज में पु्न: प्रतिष्ठा पाने के लिए आत्म मंथन करना होगा।
इस संस्था के अध्यक्ष श्री योगेंद्रपाल त्यागी जी इसके लिए आभारी हैं जिन्होंने इतने महत्वपूर्ण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन कर इससे जु्ड़े लोगों को आत्ममंथन करने के लिए विवश किया.




Wednesday, February 3, 2010

चांद पर प्लाट ले लो का लोकार्पण































०३ फरवरी २०१० को 19वें अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त बालसाहित्यकार शमशेर अहमद खा्न की पुस्तक चांद पर प्ला्ट ले लो का लोकार्पण सुप्रसिद्ध कवियित्री श्रीमती कुसुमवीर के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ। इस अवसर परानेक साहित्यकार,पत्रकार, मीडियाकर्मी और प्रकाशक तथा लेखक मौजूद थे.





Tuesday, February 2, 2010






















































































24वें अंतर्राष्ट्रीय सूरज कुंड मेले की कुछ झलकियां
















19वें अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले की कुछ झलकियां--चौथा दिन



Saturday, January 30, 2010




































































































































































































19वें विश्व पुस्तक मेला शुभारंभ

30 जनवरी २०१० से 7फरवरी२०१० तक चलने वाले 19वें विश्व पुस्तक मेले का शुभारंभ आज हो ही गया। उद्घाटन सत्र के बाद पुस्तक मंडपों में दर्शकों की भीड़ थोड़ी-बहुत तो दिखाई तो दी लेकिन छुट्टी का दिन होने के बावजूद लोग उतनी संख्या में नहीं दिखे। सरकारी आंकड़ों में साक्षरता बढ़ रही है लेकिन प्रकाश्कों की मानें तो पाठकों की संख्या घट रही है। यह उल्टा चक्र समझ के परे है। नेह्रू जी दूरद्रष्ठा थे, उन्होंने पुस्तकों के महत्व को समझा था और नेशनल बुक ट्रस्ट जैसी संस्था की स्थापना की। लेकिन आज भला कौन नेता ऐसा सोचता है।माननीय कपिल सिब्बल को ही लीजिए, कहते हैं वे बैरिस्टर हैं किंतु विश्व पुस्तक मेले की बुलेटिन में अपने संदेश में चूकते से दिखाई दिए।वे क्या कहते हैं" मुझे यह जानकर अति प्रसन्नता हुई कि नेशनल बुक ट्र्स्ट 19वें विश्व पुस्तक मेले का आयोजन करने जा रहा है..." कहावत है घर का मुखिया अगुवा होता है उसे जानने की नहीं करने की जरूरत होती है।जिस उम्मीद से प्रकाशक यहां इकट्ठा हुए हैं उनकी मन्नतें पूरी हों विशेषकर विदेशी प्रकाशक अच्छे अनुभव लेकर जाएं ताकि देश का मान बना रहे। तो आइए शपथ लें कि हम इस पुस्तक मेले में जरूर जाएं.